World Environment Day | Poetry

1.

कल जहां पेड़ पौधे थे आज वहां बड़े मकान है

शुद्ध हवा की जगह धुएँ ने फैला रखा कोहराम है, 

अभी भी सम्भल जा और पर्यावरण बचा 
वरना कल सोचेगा ये शहर या श्मशान है



2.

प्रकृति मानव से बोल रही है

तुझे मैंने बनाया, बच्चे की तरह खाना खिलाया
फिर भी तू एहसान भूल मुझे क्यूं हर पल उजाड़ने आया.. 
अब बारी तेरी है पेड़ उगा, पर्यावरण बचा

वरना कल शिकायत ना करना कि ये बर्बादी का दिन क्यूं आया...

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